करोड़ो खर्च कर बना तो दिए बायपास (सड़क),लेकिन विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे है आम नागरिक,क्या है मामला जानिए

मुंगेली/मुंगेली के जिला बनने के साथ ही आसपास क्षेत्र की जनता का लगातार यहां आगमन होते रहता है यही वजह है कि जिला मुख्यालय में एकाएक यातायात का दबाव देखने को भी मिल रहा है जिसके चलते यहां के स्थानीय जनप्रतिनिधियों के द्वारा बाईपास सड़क की मांग की गई जिसे तत्कालीन भाजपा सरकार के द्वारा वर्ष 2011 में 38 करोड़ की राशि आबंटित करते हुए स्वीकृति प्रदान किया गया लेकिन शासन का कार्य नौ दिन चले अढ़ाई कोस की रफ्तार से शुरू हुआ यही वजह है कि मुंगेली के गीधा से शुरू होते हुए बिलासपुर,जबलपुर,रायपुर रोड को जोड़ने वाली करीब 18 किमी की इस मार्ग के कार्य को पूर्ण होने में सालों लग गए।वही इस कार्य के पूर्ण होने को लेकर शासन के द्वारा तय राशि 38 करोड़ खर्च किया जाना था लेकिन कार्य अधूरा होने के चलते प्रदेश सरकार के द्वारा एक बार फिर इसी कार्य के लिए और राशि दी गयी जिसके बाद इस निर्माण कार्य की कुल राशि 78 करोड़ हो गयी वही सड़क निर्माण के दौरान किसानों की भूमि का जो अधिग्रहण किया गया है उन्हें भी इसी राशि मे से करीब 28 करोड़ का मुआवजा प्रदान किया गया है जिसके बाद जैसे तैसे ये कार्य पूर्ण तो हुआ।गौरतलब हो कि इस कार्य को दो ठेकेदारों के द्वारा किया गया है पहले ठेकेदार मेसर्स जिंदल के द्वारा मिट्टी का कार्य किया गया वही दूसरे ठेकेदार अनिल बिल्डकॉन के द्वारा सड़क का डामरीकरण जैसे अन्य कार्यो को पूरा किया गया लेकिन इस निर्माण कार्य के दौरान दोनों ठेकेदारों के द्वारा जमकर मनमानी के साथ साथ कई लापरवाही भी किये गए जिसमे एक बड़ी लापरवाही इस मार्ग में कोई सूचना संकेत नही लगाए गए जिसके चलते भारी वाहन या फर्राटे भर रहे है जिसके कारण आसपास के रहवासी सहित अन्य राहगीर अपने जान जोखिम में डालकर यात्रा करने में मजबूर है और अनावश्यक दुर्घटना के शिकार हो रहे है इस बाईपास मार्ग में होने वाले आये दिन दुर्घटनाओं में राहगीर या तो अकारण ही काल के गाल में समा रहे है या फिर अपाहिज हो रहे है जिसके चलते आम नागरिकों में लोक निर्माण विभाग की इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है जो कभी भी एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।ये मुंगेली जिले का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि प्रदेश में मध्यम गति से कार्य होने को लेकर अगर किसी जिले का नाम लिया जाए तो सबसे पहले मुंगेली जिले का नाम लोगों के जुबान पर आता है वही लोक निर्माण विभाग में ठेकेदारों के द्वारा जो भी कार्य किया जाता है उसका किसी तरह से निरीक्षण अधिकारियों द्वारा नही किया जाता है सम्बंधित ठेकेदार द्वारा किये गए कार्यो की जो भी जानकारी दिया जाता है लोक निर्माण विभाग के अधिकारी अपने AC चेम्बर में बैठे बैठे उन कार्यो की गुणवत्ता का प्रमाण पत्र जारी कर देते है वही ठेकेदार के द्वारा किये जा रहे लापरवाही या मनमानी के बारे में अगर कोई जागरूक नागरिक शिकायत करने अधिकारियों से सम्पर्क किया जाता है तो यही अधिकारी उनके फोन कॉल तक को रिसीव करने की जहमत नही उठाते जबकि प्रदेश सरकार से पगार के रूप में मोटी रकम पाने वाले यही अधिकारी अपने आपको जनता के नौकर के रूप में संबोधित कर अपने ही हांथ से अपने ही पीठ को थपथपाते है अब ऐसे में आम नागरिक अपनी शिकायत को लेकर आखिर कहाँ जाए वही इस मार्ग में भारी वाहनों के चलने से लगातार हो रहे दुर्घटनाओं के चलते आम नागरिक बाईपास मार्ग में गति अवरोधक बनाये जाने के साथ ही सूचना संकेत लगाए जाने की मांग कर रहे है।वही इस बारे में जिले के कलेक्टर पी एस एल्मा के द्वारा जानकारी दिया गया है कि बाईपास सड़क में हो रहे दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाए जाने को लेकर सम्बंधित विभाग के अधिकारियों कि बैठक लेकर इस विषय से अवगत कराते हुए जल्द कार्यवाही किये जाने के लिए निर्देश दिए गए है।अब देखना होगा के सम्बंधित विभाग के अधिकारियों के द्वारा जिले के कलेक्टर के द्वारा दिये गए निर्देशों का पालन कब तक किया जाता है या फिर उक्त स्थानों का निरीक्षण किये बगैर अपने AC चेम्बर से ही इस निर्देश का पालन करते हुए मामले से पल्ला झाड़ लिया जाएगा ये तो आने वाले दिनों में ही तस्वीर साफ होगी।