STATE TODAY|गौठान की भूमि पर लोगों ने किया अतिक्रमण,भूपेश सरकार की महत्वकांक्षी योजना पड़ी अधर में,ग्रामीणों ने कलेक्टर से शिकायत कर किया कार्यवाही की मांग

मुंगेली/जिले में लॉकडउन अवधि में जहा प्रशासन कोरोना से जंग जीतने में प्रशासन ऐडी चोटी एक करने में लगे है,वही इसका फायदा उठाकर बेजा कब्जाधारी बेखौफ अपने काम को अंजाम देने में लगे है कोरोना के कहर ने जहां लोगों के जीवन को अस्तव्यस्त कर रखा है वही अवैध प्लाटिंग सहित शासकीय भूमी में बेजा कब्जा करने वाली की चांदी होने लगी है, जो नियमों को ताक में रखकर अपने काम को अंजाम दे रहे है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय सहित तीन ब्लॉकों में ये बेजा कब्जा करने वाले लोग शासकीय जमीनो पर बेखौफ कब्जा करने में लगे है। ऐसा ही एक मामला जिला मुख्यालय से 16 कि.मी दूर ग्राम सेतांगा में देखने को मिला है जिसमें सरपंच एवं जनप्रतिनिधियों के अनुसार गांव में गोठान निर्माण के लिए जमीन तलाशने प्रशासन को कड़ी मसक्कट करनी पड़ रही है, राज्य सरकार जहां एक ओर नरवा, गरूवा, धुरवा और बाड़ी को प्राथमिकता देते हुए शासकीय भूमि का शतप्रतिशत उपयोग करने का प्रयास कर रही है। वही ग्राम पंचायत खैरा सेतगंगा में चारागाह, शमशान के लिए सुरक्षित भूमि बाजार की भूमि में बेजा कब्जा धारियों ने शासकीय भूमि पर कब्जा कर लिया है। और प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर भू राजस्व अधिनियम को दरकिनार करते हुए अपने उची रसूख के चलते पट्टा बनवा लिए है। खसरा नंबर 215, 217, 220 एवं 221 की शासकीय भूमि पर कब्जा धारियों से बेजा कब्जा हटाने एवं जारी किये गये पट्टा को निरस्थ करने की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों की टीम जिला मुख्यालय पहुचंकर ज्ञापन सौंपा है।
सरकार की अतिमहत्वकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी को मूर्तरूप देने खैरा सेतगंगा पंचायत के मासिक बैठक में 7 दिसम्बर 2020 को 13 पंचो की मौैजुदगी में प्रस्ताव पारित की गई जिसके बाद सरपंच जय देवांगन ने खसरा नंबर 215, 217, 220 एवं 221 की शासकीय भूमि के वस्तुस्थिति का पता लगाने नायाब तहसीलदार, जनपद सीईओ एवं कलेक्टर को सीमांकन के लिए आवेदन दिया गया तत्पश्चात नायाब तहसीलदार ने सीमांकन के लिए टीम लेकर खैरा सेतगंगा पहुंचे जहां सीमांकन के दौरान चैकाने वाले तथ्य सामने आया जिसमें भू राजस्व रिकार्ड में शमशान, चारागाह, बाजार की भूमि सिमट चुकी है, यहां पर बेजा कब्जा धारियों ने पहले से कब्जा कर मकान बनाये फिर शासन की आंख में भूल झोंक कर भू राजस्व अधिनियम को दरकिनार कर पट्टा बनवा लिये है। ऐसे में शासन के सामने बड़ी चुनौती है कि कब्जाधारियों को कैसे बेदख किया जाए, जारी किए गए पट्टे को कैसे निरस्त किया जाए। इस गंभीर मामले पर शासन क्या रूख अपनाती है यह आने वाला समय ही बताएगा? खसरा नंबर 220 एवं 221 की शासकीय भूमि पर एक ही परिवार के 4,5 लोगों को पट्टा दे दिया गया है। गौरतलब है कि एक ही व्यक्ति को एक ही पंचायत में चार पांच जगहों का पट्टा कहीं 06 ढ़िसमिल तो कही पर 08 ढ़िसमिल तो कहीं पर 10 ढ़िसमिल पट्टा जारी किया गया है। जबकि भू राजस्व अधिनियम के तहत भूमिहिन व्यक्ति को एक बार में ही लगभग 2 से 2.5 पट्टा देने का प्रावधान है।
ग्राम पंचायत खैरा सेतगंगा सरपंच जय देवांगन ने बताया कि गौठान निर्माण स्वीकृति हुआ है, किन्तु निर्धारित जगह में बेजा कब्जाधारियों का कब्जा होने होने के कारण निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न हो रहा है। जिन बेजा कब्जा धारियों को पट्टा वितरण किया गया है। उसे निरस्थ करने की मांग कलेक्टर से की गई है। जिस पर लगभग 1 माह से अधिक समय बितने के बाद भी अभी तक कोई कार्यवाही नही हुई है।